Futures और Options (F&O) क्या हैं? मतलब, प्रकार और उदाहरण
यह लेख अंग्रेज़ी से अनुवाद किया गया है। मूल लेख अंग्रेज़ी में पढ़ें
Futures और options (F&O) derivative कॉन्ट्रैक्ट हैं: इनकी कीमत किसी underlying asset से आती है, जैसे कोई स्टॉक, NIFTY 50 जैसा index, कोई commodity या currency। Future एक तय तारीख पर तय कीमत पर underlying को ख़रीदने या बेचने की बाध्यता (obligation) है। Option ख़रीदार को premium के बदले तय कीमत पर ख़रीदने (call) या बेचने (put) का अधिकार देता है, बाध्यता नहीं।
Derivatives क्या हैं?
Derivative एक ऐसा कॉन्ट्रैक्ट है जिसकी कीमत किसी और चीज़ से निकलती है। आप ख़ुद asset नहीं ख़रीदते; आप उसकी कीमत से जुड़ा कॉन्ट्रैक्ट ख़रीदते या बेचते हैं। भारतीय exchanges पर ट्रेड होने वाले दो मुख्य प्रकार futures और options हैं, और दोनों को मिलाकर F&O कहा जाता है।
ट्रेडर्स और निवेशक इन्हें तीन कामों के लिए इस्तेमाल करते हैं:
- Hedging: किसी portfolio या बिज़नेस को कीमत की हलचल से बचाना।
- Speculation: asset ख़रीदने से कम पूंजी में दिशा या volatility पर अपना अनुमान लगाना।
- Arbitrage: cash और derivatives market के बीच कीमत के छोटे अंतर से मुनाफ़ा कमाना।
Futures कॉन्ट्रैक्ट क्या है?
Futures कॉन्ट्रैक्ट एक समझौता है जिसमें किसी underlying asset को आज तय की गई कीमत पर, आगे की एक तय तारीख (expiry) को settlement के लिए ख़रीदा या बेचा जाता है। दोनों पक्ष बंधे होते हैं: ख़रीदार को ख़रीदना ही होगा और बेचने वाले को बेचना ही होगा।
Exchange पर, जो ट्रेडर 25,000 पर NIFTY futures का एक lot ख़रीदता है, उसे NIFTY के हर पॉइंट बढ़ने पर ₹65 का फ़ायदा होता है (एक lot = 65 units) और हर पॉइंट गिरने पर ₹65 का नुकसान। 200 पॉइंट की चाल एक lot पर ₹13,000 का मुनाफ़ा या नुकसान है।
Futures की मुख्य बातें:
- पूरी रकम नहीं, margin। आप broker के पास पूरी रकम नहीं, बल्कि margin (कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू का एक हिस्सा) जमा करते हैं। इससे futures leveraged बन जाते हैं।
- Mark-to-market। मुनाफ़ा और नुकसान हर दिन आपके अकाउंट में settle होते हैं। अगर नुकसान आपका margin खाने लगे, तो आपको और पैसे डालने होंगे।
- Expiry। NSE पर index और stock futures मासिक कॉन्ट्रैक्ट हैं। आप expiry से पहले पोज़िशन बंद कर सकते हैं या अगले महीने में roll कर सकते हैं।
Options कॉन्ट्रैक्ट क्या है?
Option ख़रीदार को expiry पर या उससे पहले, तय कीमत (strike) पर underlying ख़रीदने या बेचने का अधिकार देता है, बाध्यता नहीं। इस अधिकार के लिए ख़रीदार बेचने वाले को premium देता है।
- Call option (CE) ख़रीदने का अधिकार है। अगर आपको लगता है कि कीमत बढ़ेगी, तो आप call ख़रीदते हैं।
- Put option (PE) बेचने का अधिकार है। अगर आपको लगता है कि कीमत गिरेगी, या आप अपने शेयरों को बचाना चाहते हैं, तो आप put ख़रीदते हैं।
NIFTY पर: अगर आप 25,000 का call ₹250 पर ख़रीदते हैं, तो एक lot की लागत ₹250 × 65 = ₹16,250 है। यही आपका अधिकतम नुकसान है। अगर NIFTY 25,500 पर expire होता है, तो call की कीमत ₹500 होगी, और आपका मुनाफ़ा (500 − 250) × 65 = ₹16,250 होगा। 25,000 से नीचे call बेकार (शून्य) होकर expire होता है।
Futures बनाम options: मुख्य अंतर
एक ही तेज़ी वाला अनुमान: future पॉइंट-दर-पॉइंट चलता है; call नुकसान को premium तक सीमित रखता है
| Futures | Options (ख़रीदार) | Options (बेचने वाला) | |
|---|---|---|---|
| अधिकार या बाध्यता | बाध्यता | अधिकार | बाध्यता |
| शुरुआती लागत | Margin | Premium | Margin (premium मिलता है) |
| अधिकतम नुकसान | बड़ा, कोई सीमा नहीं | चुकाया गया premium | बड़ा; naked call में असीमित |
| अधिकतम मुनाफ़ा | कोई सीमा नहीं | कोई सीमा नहीं (call), बड़ा (put) | मिला हुआ premium |
| Time decay | सीधा असर नहीं | आपके ख़िलाफ़ काम करता है | आपके पक्ष में काम करता है |
| Volatility का असर | कम | IV बढ़ने पर फ़ायदा | IV बढ़ने पर नुकसान |
भारत में futures और options के प्रकार
| प्रकार | Underlying | कहां ट्रेड होता है | आम यूज़र |
|---|---|---|---|
| Index F&O | NIFTY 50, BANK NIFTY, FINNIFTY, MIDCPNIFTY, SENSEX और अन्य | NSE, BSE | ट्रेडर्स, portfolio hedge करने वाले |
| Stock F&O | चुने हुए बड़े, liquid स्टॉक्स | NSE, BSE | ट्रेडर्स, अपनी होल्डिंग्स hedge करने वाले निवेशक |
| Commodity F&O | सोना, चांदी, कच्चा तेल, नैचुरल गैस, धातुएं, कृषि उत्पाद | MCX, NCDEX | कीमतें hedge करने वाले बिज़नेस, ट्रेडर्स |
| Currency F&O | USD/INR, EUR/INR, GBP/INR, JPY/INR | NSE, BSE | आयातक, निर्यातक, ट्रेडर्स |
| Interest rate futures | सरकारी बॉन्ड | NSE, BSE | बैंक, संस्थाएं |
ज़्यादातर रिटेल F&O गतिविधि index और stock derivatives में होती है। सिर्फ़ उन्हीं स्टॉक्स के F&O कॉन्ट्रैक्ट होते हैं जो exchanges की पात्रता शर्तें पूरी करते हैं।
"Future options" या options on futures क्या हैं?
जब किसी option का underlying ख़ुद एक futures कॉन्ट्रैक्ट हो, तो उसे option on futures (या futures option) कहते हैं। Option ख़रीदार को strike price पर futures कॉन्ट्रैक्ट में पोज़िशन लेने का अधिकार मिलता है। ये commodity बाज़ारों में आम हैं। हालांकि, भारतीय इक्विटी में ज़्यादातर रिटेल ट्रेडर्स के लिए "F&O" का मतलब बस स्टॉक्स और indices पर futures और options है, यानी दो अलग तरह के कॉन्ट्रैक्ट।
भारत में F&O कॉन्ट्रैक्ट कैसे काम करते हैं
Lot size
F&O की ट्रेडिंग तय lots में होती है। जनवरी 2026 सीरीज़ से, NIFTY का lot size 65 और BANK NIFTY का 30 है। स्टॉक्स के lot size हर स्टॉक के लिए अलग होते हैं और समय-समय पर बदलते हैं, इसलिए exchange की मौजूदा सूची देखें।
Expiry
- मंगलवार weekly और monthly कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए NSE का expiry दिन
- 1 हर exchange पर एक weekly index expiry: NSE पर NIFTY, BSE पर SENSEX
- मासिक BANK NIFTY, FINNIFTY और MIDCPNIFTY की expiry
Settlement
Index F&O cash-settled होता है: expiry पर सिर्फ़ अंतर का भुगतान होता है। NSE पर stock F&O physically settled होता है: expiry पर खुला stock future या in-the-money stock option शेयरों की डिलीवरी में बदल जाता है, इसलिए जिन पोज़िशन्स की डिलीवरी नहीं चाहिए, उन्हें बंद या roll करें।
Margin
Futures ख़रीदने और बेचने वालों, और option बेचने वालों को अपने broker के पास margin रखना होता है, जिसकी गणना exchange का रिस्क सिस्टम (SPAN plus exposure margin) करता है। Option ख़रीदार सिर्फ़ premium देते हैं। Margin की ज़रूरत volatility के साथ बदलती है, इसलिए हर ट्रेड से पहले इसे जांचें।
F&O के फ़ायदे और जोखिम
फ़ायदे
- किसी portfolio या बिज़नेस को उलटी कीमत की चाल से hedge करना
- Asset ख़रीदने से कम पूंजी में पोज़िशन लेना
- सही ढांचे के साथ बढ़ते, गिरते या साइडवेज़ बाज़ार से मुनाफ़ा कमाना
- Option ख़रीदारों को अपना अधिकतम नुकसान पहले से पता होता है
- NIFTY और दूसरे बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स में गहरे, liquid बाज़ार
जोखिम
- Leverage मुनाफ़े के साथ नुकसान को भी बढ़ाता है
- Futures और short options में जमा margin से ज़्यादा नुकसान हो सकता है
- Option ख़रीदारों को हर दिन time decay झेलना पड़ता है
- Expiry के दिन की चाल तेज़ और अचानक हो सकती है
- SEBI की स्टडी दिखाती है कि ज़्यादातर व्यक्तिगत F&O ट्रेडर्स पैसा गंवाते हैं
भारत में futures और options की ट्रेडिंग कैसे शुरू करें
- किसी SEBI-registered broker के साथ demat और trading account खोलें और F&O segment चालू करें (brokers इनकम का सबूत और risk disclosure मांगते हैं)।
- बेसिक बातें सीखें: lot size, margin, expiry और option chain कैसे पढ़ें। हमारी भारत में options trading गाइड इन सबको कवर करती है।
- तय रिस्क से शुरू करें: naked futures या option selling की जगह option ख़रीदना, या hedged spread।
- पहले प्लान लिखें: entry, stop loss, target और पोज़िशन साइज़।
- ट्रेड करने से पहले टेस्ट करें: नियमों का historical data पर backtest करें और उन्हें simulated मोड में चलाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शेयर बाज़ार में F&O क्या है?
F&O का मतलब है futures और options, जो भारतीय exchanges पर ट्रेड होने वाले derivative कॉन्ट्रैक्ट्स के दो मुख्य प्रकार हैं। इनकी कीमत किसी underlying asset से आती है, जैसे कोई स्टॉक, index, commodity या currency।
Futures और options में क्या अंतर है?
Future ख़रीदार और बेचने वाले, दोनों को expiry पर तय कीमत पर underlying का सौदा करने के लिए बाध्य करता है। Option ख़रीदार को अधिकार देता है, बाध्यता नहीं, और इसके लिए premium लगता है। Futures पोज़िशन में बिना सीमा का नुकसान हो सकता है; option ख़रीदार सिर्फ़ premium गंवा सकता है।
ज़्यादा जोखिम किसमें है, futures या options?
Options ख़रीदने में अधिकतम नुकसान सबसे कम (premium) होता है, लेकिन समय के साथ इसकी कीमत घटती है। Futures और option selling में बड़ा, बिना सीमा का जोखिम होता है क्योंकि नुकसान underlying के साथ चलता है। जोखिम इस पर निर्भर करता है कि आप कॉन्ट्रैक्ट के किस तरफ़ हैं।
Futures और options के प्रकार कौन-से हैं?
भारत में: index F&O (जैसे NIFTY 50 और SENSEX), stock F&O, MCX और NCDEX पर commodity F&O, currency F&O (जैसे USD/INR) और interest rate futures।
F&O ट्रेड करने के लिए कितने पैसे चाहिए?
Option ख़रीदने के लिए premium × lot size चाहिए। Futures और option selling के लिए margin चाहिए, जो आमतौर पर कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू का एक हिस्सा होता है, लेकिन index कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए फिर भी प्रति lot एक लाख रुपये से ज़्यादा हो सकता है। अपने broker का margin calculator देखें।
भारत में F&O कॉन्ट्रैक्ट cash-settled होते हैं या physically settled?
Index futures और options cash-settled होते हैं। NSE पर stock futures और options physically settled होते हैं, इसलिए expiry पर खुली पोज़िशन्स से शेयरों की डिलीवरी हो सकती है।
क्या F&O ट्रेडिंग ऑटोमेट की जा सकती है?
हां। Tradetron जैसे प्लेटफ़ॉर्म आपको futures और options strategies को नियमों के रूप में बनाने, उनका backtest करने और अपने broker के ज़रिए उन्हें अपने आप चलाने देते हैं।